वाल्मीकि रामायण 4.43.7
अर्थिनः कार्य निर्वृत्तिम् अकर्तुम् अपि यः चरेत् ।तस्य स्यात् सफलम् जन्म किम् पुनः पूर्व कारिणः॥
arthinaḥ kārya nirvṛttim akartum api yaḥ caret |tasya syāt saphalam janma kim punaḥ pūrva kāriṇaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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