वाल्मीकि रामायण 4.48.4
अन्वेषमाणाः ते सर्वे वानराः सर्वतो दिशम् ।न सीताम् ददृशुर् वीरा मैथिलीम् जनक आत्मजाम्॥
anveṣamāṇāḥ te sarve vānarāḥ sarvato diśam |na sītām dadṛśur vīrā maithilīm janaka ātmajām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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