वाल्मीकि रामायण 4.50.3
आसेदुः तस्य शैलस्य कोटिम् दक्षिण पस्चिमाम् ।तेषाम् तत्र एव वसताम् स कालो व्यत्यवर्तत॥
āseduḥ tasya śailasya koṭim dakṣiṇa pascimām |teṣām tatra eva vasatām sa kālo vyatyavartata ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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