वाल्मीकि रामायण 4.54.11
न हि अहम् ते इमे सर्वे साम दान आदिभिः गुणैः ।दण्डेन न त्वया शक्याः सुग्रीवात् अपकर्षितुम्॥
na hi aham te ime sarve sāma dāna ādibhiḥ guṇaiḥ |daṇḍena na tvayā śakyāḥ sugrīvāt apakarṣitum ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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