वाल्मीकि रामायण 4.54.12
विगृह्य आसनम् अपि आहुः दुर्बलेन बलीयसा ।आत्म रक्षा करः तस्मात् न विगृह्णीत दुर्बलः॥
vigṛhya āsanam api āhuḥ durbalena balīyasā |ātma rakṣā karaḥ tasmāt na vigṛhṇīta durbalaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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