वाल्मीकि रामायण 4.54.16
अवस्थाने यदा एव त्वम् आसिष्यसि परंतप ।तदा एव हरयः सर्वे त्यक्ष्यन्ति कृत निश्चयाः॥
avasthāne yadā eva tvam āsiṣyasi paraṃtapa |tadā eva harayaḥ sarve tyakṣyanti kṛta niścayāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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