वाल्मीकि रामायण 4.56.19
को अयम् गिरा घोषयति प्राणैः प्रियतरस्य मे ।जटायुषो वधम् भ्रातुः कंपयन् इव मे मनः॥
ko ayam girā ghoṣayati prāṇaiḥ priyatarasya me |jaṭāyuṣo vadham bhrātuḥ kaṃpayan iva me manaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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