वाल्मीकि रामायण 4.58.21
जांबूनदमयैः द्वारैः चित्रैः कांचन वेदिकैः ।प्रासादैः हेम वर्णैः च महद्भिः सुसमाकृता॥
jāṃbūnadamayaiḥ dvāraiḥ citraiḥ kāṃcana vedikaiḥ |prāsādaiḥ hema varṇaiḥ ca mahadbhiḥ susamākṛtā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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