वाल्मीकि रामायण 4.58.22
प्राकारेण अर्क वर्णेन महता च समन्विता ।तस्याम् वसति वैदेही दीना कौशेय वासिनी॥
prākāreṇa arka varṇena mahatā ca samanvitā |tasyām vasati vaidehī dīnā kauśeya vāsinī ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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