वाल्मीकि रामायण 4.59.15
सो अहम् अभ्यवहार अर्थम् तौ दृष्ट्वा कृत निश्चयः ।तेन साम्ना विनीतेन पन्थानम् अनुयाचितः॥
so aham abhyavahāra artham tau dṛṣṭvā kṛta niścayaḥ |tena sāmnā vinītena panthānam anuyācitaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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