वाल्मीकि रामायण 4.59.17
स यातः तेजसा व्योम संक्षिपन् इव वेगतः ।अथ अहम् खे चरैः भूतैः अभिगम्य सभाजितः॥
sa yātaḥ tejasā vyoma saṃkṣipan iva vegataḥ |atha aham khe caraiḥ bhūtaiḥ abhigamya sabhājitaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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