वाल्मीकि रामायण 4.61.16
आशन्के तम् निपतितम् जनस्थाने जटायुषम् ।अहम् तु पतितो विन्ध्ये दग्ध पक्षो जडी कृतः॥
āśanke tam nipatitam janasthāne jaṭāyuṣam |aham tu patito vindhye dagdha pakṣo jaḍī kṛtaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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