वाल्मीकि रामायण 4.64.4
दक्षिणस्य समुद्रस्य समासाद्य उत्तराम् दिशम् ।संनिवेशम् ततः चक्रुः सहिता वानर उत्तमाः॥
dakṣiṇasya samudrasya samāsādya uttarām diśam |saṃniveśam tataḥ cakruḥ sahitā vānara uttamāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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