वाल्मीकि रामायण 4.7.2
न जाने निलयम् तस्य सर्वथा पाप रक्षसः ।सामर्थ्यम् विक्रमम् वा अपि दौष्कुलेयस्य वा कुलम्॥
na jāne nilayam tasya sarvathā pāpa rakṣasaḥ |sāmarthyam vikramam vā api dauṣkuleyasya vā kulam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें