वाल्मीकि रामायण 4.8.15
सुख उपविष्टम् रामम् तु प्रसन्नम् उदधिम् यथा ।साल पुष्पाव संकीर्णे तस्मिन् गिरिवर उत्तमे॥
sukha upaviṣṭam rāmam tu prasannam udadhim yathā |sāla puṣpāva saṃkīrṇe tasmin girivara uttame ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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