वाल्मीकि रामायण 4.8.2
सर्वथा अहम् अनुग्राह्यो देवतानाम् न संशयः ।उपपन्नः गुण उपेतः सखा यस्य भवान् मम॥
sarvathā aham anugrāhyo devatānām na saṃśayaḥ |upapannaḥ guṇa upetaḥ sakhā yasya bhavān mama ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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