वाल्मीकि रामायण 4.8.42
सुखम् हि कारणम् श्रुत्वा वैरस्य तव वानर ।आनन्तर्यद् विधास्यामि संप्रधार्य बलाबलम्॥
sukham hi kāraṇam śrutvā vairasya tava vānara |ānantaryad vidhāsyāmi saṃpradhārya balābalam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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