वाल्मीकि रामायण 5.1.103
यथा जलधरं भित्त्वा दीप्तरश्मिर्दिवाकरः ।स महात्मा मुहूर्तेन सर्वतः सलिलावृतः॥
yathā jaladharaṃ bhittvā dīptaraśmirdivākaraḥ |sa mahātmā muhūrtena sarvataḥ salilāvṛtaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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