वाल्मीकि रामायण 5.1.122
पूजिते त्वयि धर्मज्ञ पूजां प्राप्नोति मारुतः ।तस्मात्त्वं पूजनीयो मे शृणु चाप्यत्र कारणम्॥
pūjite tvayi dharmajña pūjāṃ prāpnoti mārutaḥ |tasmāttvaṃ pūjanīyo me śṛṇu cāpyatra kāraṇam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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