वाल्मीकि रामायण 5.1.127
अस्मिन्लवणतोये च प्रक्षिप्तः प्लवगोत्तम ।गुप्तपक्षसमग्रश्च तव पित्राभिरक्षितः॥
asminlavaṇatoye ca prakṣiptaḥ plavagottama |guptapakṣasamagraśca tava pitrābhirakṣitaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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