वाल्मीकि रामायण 5.1.12
स चचालाचलश्चापि मुहूर्तं कपिपीडितः ।तरूणां पुष्पिताग्राणां सर्वं पुष्पमशातयत्॥
sa cacālācalaścāpi muhūrtaṃ kapipīḍitaḥ |tarūṇāṃ puṣpitāgrāṇāṃ sarvaṃ puṣpamaśātayat ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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