वाल्मीकि रामायण 5.1.153
रामो दाशरथिर्नाम प्रविष्टो दण्डकावनम् ।लक्ष्मणेन सह भ्रात्रा वैदेह्या चापि भार्यया॥
rāmo dāśarathirnāma praviṣṭo daṇḍakāvanam |lakṣmaṇena saha bhrātrā vaidehyā cāpi bhāryayā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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