वाल्मीकि रामायण 5.1.15
पीड्यमानस्तु बलिना महेन्द्रस्तेन पर्वतः ।रीतीर्निर्वर्तयामास काञ्चनाञ्जनराजतीः॥
pīḍyamānastu balinā mahendrastena parvataḥ |rītīrnirvartayāmāsa kāñcanāñjanarājatīḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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