वाल्मीकि रामायण 5.1.166
चकार सुरसा व्क्त्रम्शीतीयोजनोच्छ्रितम् ।हनुमानचलप्रख्यो नवतीयोजनोच्छ्रितः॥
cakāra surasā vktramśītīyojanocchritam |hanumānacalaprakhyo navatīyojanocchritaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें