वाल्मीकि रामायण 5.1.175
सिंहकुञ्जरशार्दूलपतगोरगवाहनैः ।विमानैः संपतद्भिश्च विमलैः समलंकृते॥
siṃhakuñjaraśārdūlapatagoragavāhanaiḥ |vimānaiḥ saṃpatadbhiśca vimalaiḥ samalaṃkṛte ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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