वाल्मीकि रामायण 5.1.179
देवराजगजाक्रान्ते चन्द्रसूर्यपथे शिवे ।विताने जीवलोकस्य वितते ब्रह्मनिर्मिते॥
devarājagajākrānte candrasūryapathe śive |vitāne jīvalokasya vitate brahmanirmite ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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