वाल्मीकि रामायण 5.1.17
गिरिणा पीड्यमानेन पीड्यमानानि सर्वशः ।गुहाविष्टानि भूतानि विनेदुर्विकृतैः स्वरैः॥
giriṇā pīḍyamānena pīḍyamānāni sarvaśaḥ |guhāviṣṭāni bhūtāni vinedurvikṛtaiḥ svaraiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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