वाल्मीकि रामायण 5.1.32
दुधुवे च स रोमाणि चकम्पे चाचलोपमः ।ननाद सुमहानादं सुमहानिव तोयदः॥
dudhuve ca sa romāṇi cakampe cācalopamaḥ |nanāda sumahānādaṃ sumahāniva toyadaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें