वाल्मीकि रामायण 5.1.46
स मत्तकोयष्टिभकान् पादपान् पुष्पशालिनः ।उद्वहन्नूरुवेगेन जगाम विमलेऽम्बरे॥
sa mattakoyaṣṭibhakān pādapān puṣpaśālinaḥ |udvahannūruvegena jagāma vimale'mbare ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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