वाल्मीकि रामायण 5.1.76
दशयोजनविस्तीर्णा त्रिंशद्योजनमायता ।छाया वानरसिंहस्य जले चारुतराभवत्॥
daśayojanavistīrṇā triṃśadyojanamāyatā |chāyā vānarasiṃhasya jale cārutarābhavat ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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