वाल्मीकि रामायण 5.1.94
पाताLअस्याप्रमेयस्य द्वारमावृत्य तिष्ठसि ।तिर्यगूर्ध्वमधश्चैव शक्तिस्ते शैल वर्धितुम्॥
pātāLasyāprameyasya dvāramāvṛtya tiṣṭhasi |tiryagūrdhvamadhaścaiva śaktiste śaila vardhitum ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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