वाल्मीकि रामायण 5.10.2
दान्तकाञ्चनिचित्राङ्गेर्वैश्च वरासनैः ।महार्हस्तरणोपेतैरुपपन्नम् महाधनैः॥
dāntakāñcanicitrāṅgervaiśca varāsanaiḥ |mahārhastaraṇopetairupapannam mahādhanaiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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