वाल्मीकि रामायण 5.10.3
तस्य च एकतमे देशे सो अग्र्य माल्य विभूषितम् ।ददर्श पाण्डुरम् चत्रम् तारा अधिपति सम्निभम्॥
tasya ca ekatame deśe so agrya mālya vibhūṣitam |dadarśa pāṇḍuram catram tārā adhipati samnibham ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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