वाल्मीकि रामायण 5.13.20
भवेद् इति मतिम् भूयो हनुमान् प्रविचारयन् ।यदि सीताम् अदृष्ट्वा अहम् वानर इन्द्र पुरीम् इतः॥
bhaved iti matim bhūyo hanumān pravicārayan |yadi sītām adṛṣṭvā aham vānara indra purīm itaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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