वाल्मीकि रामायण 5.13.23
किष्किन्धाम् समनुप्राप्तौ तौ वा दशरथ आत्मजौ ।गत्वा तु यदि काकुत्स्थम् वक्ष्यामि परम् अप्रियम्॥
kiṣkindhām samanuprāptau tau vā daśaratha ātmajau |gatvā tu yadi kākutstham vakṣyāmi param apriyam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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