वाल्मीकि रामायण 5.13.26
भृश अनुरक्तो मेधावी न भविष्यति लक्ष्मणः ।विनष्टौ भ्रातरौ श्रुत्वा भरतो अपि मरिष्यति॥
bhṛśa anurakto medhāvī na bhaviṣyati lakṣmaṇaḥ |vinaṣṭau bhrātarau śrutvā bharato api mariṣyati ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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