वाल्मीकि रामायण 5.13.38
इक्ष्वाकु कुल नाशः च नाशः चैव वन ओकसाम् ।सो अहम् न एव गमिष्यामि किष्किन्धाम् नगरीम् इतः॥
ikṣvāku kula nāśaḥ ca nāśaḥ caiva vana okasām |so aham na eva gamiṣyāmi kiṣkindhām nagarīm itaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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