वाल्मीकि रामायण 5.13.43
शरीरम् भक्षयिष्यन्ति वायसाः श्वापदानि च ।इदम् अपि ऋषिभिर् दृष्टम् निर्याणम् इति मे मतिः॥
śarīram bhakṣayiṣyanti vāyasāḥ śvāpadāni ca |idam api ṛṣibhir dṛṣṭam niryāṇam iti me matiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें