वाल्मीकि रामायण 5.13.50
कामम् अस्तु हृता सीता प्रत्याचीर्णम् भविष्यति ।अथवा एनम् समुत्क्षिप्य उपरि उपरि सागरम्॥
kāmam astu hṛtā sītā pratyācīrṇam bhaviṣyati |athavā enam samutkṣipya upari upari sāgaram ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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