वाल्मीकि रामायण 5.13.54
अपश्यन् राघवो भार्याम् निर्दहेत् सर्व वानरान् ।इह एव नियत आहारो वत्स्यामि नियत इन्द्रियः॥
apaśyan rāghavo bhāryām nirdahet sarva vānarān |iha eva niyata āhāro vatsyāmi niyata indriyaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें