वाल्मीकि रामायण 5.14.14
तरस्विना ते तरवः तरसा अभिप्रकम्पिताः ।कुसुमानि विचित्राणि सस्Rजुः कपिना तदा॥
tarasvinā te taravaḥ tarasā abhiprakampitāḥ |kusumāni vicitrāṇi sasRjuḥ kapinā tadā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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