वाल्मीकि रामायण 5.14.15
निर्धूत पत्र शिखराः शीर्ण पुष्प फल द्रुमाः ।निक्षिप्त वस्त्र आभरणा धूर्ता इव पराजिताः॥
nirdhūta patra śikharāḥ śīrṇa puṣpa phala drumāḥ |nikṣipta vastra ābharaṇā dhūrtā iva parājitāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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