वाल्मीकि रामायण 5.14.9
मार्गमाणो वर आरोहाम् राज पुत्रीम् अनिन्दिताम् ।सुख प्रसुप्तान् विहगान् बोधयाम् आस वानरः॥
mārgamāṇo vara ārohām rāja putrīm aninditām |sukha prasuptān vihagān bodhayām āsa vānaraḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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