वाल्मीकि रामायण 5.16.3
मान्या गुरु विनीतस्य लक्ष्मणस्य गुरु प्रिया ।यदि सीता अपि दुह्ख आर्ता कालो हि दुरतिक्रमः॥
mānyā guru vinītasya lakṣmaṇasya guru priyā |yadi sītā api duhkha ārtā kālo hi duratikramaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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