वाल्मीकि रामायण 5.17.12अतिनासाश्च तिर्यङ्नासा अनासिकाः ।गजनन्निभनासाश्च ललाटोच्च्वासनासिकाः॥atināsāśca tiryaṅnāsā anāsikāḥ |gajanannibhanāsāśca lalāṭoccvāsanāsikāḥ ||इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें