वाल्मीकि रामायण 5.17.2
साचिव्यमिव कुर्वन् स प्रभया निर्मलप्रभः ।चन्द्रमा रश्मभिः शीतैः सिषेवे पवनात्मजम्॥
sācivyamiva kurvan sa prabhayā nirmalaprabhaḥ |candramā raśmabhiḥ śītaiḥ siṣeve pavanātmajam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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