वाल्मीकि रामायण 5.18.32
स तामसितकेशान्तां सुश्रोणीं संहतस्तनीम् ।दिदृक्षुरसितापाङ्गमुपावर्तत रावणः॥
sa tāmasitakeśāntāṃ suśroṇīṃ saṃhatastanīm |didṛkṣurasitāpāṅgamupāvartata rāvaṇaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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