वाल्मीकि रामायण 5.18.7
वृतां पुष्करिणीभिश्च नानापुष्पोपशोभिताम् ।सदामदैश्च विहगैर्विचित्राम् परमाद्भुताम्॥
vṛtāṃ puṣkariṇībhiśca nānāpuṣpopaśobhitām |sadāmadaiśca vihagairvicitrām paramādbhutām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें