वाल्मीकि रामायण 5.19.2
दुःखार्ता रुदती सीता वेपमाना तपस्विनी ।चिन्तयन्ती वरारोहा पतिमेव पतिव्रता॥
duḥkhārtā rudatī sītā vepamānā tapasvinī |cintayantī varārohā patimeva pativratā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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