वाल्मीकि रामायण 5.19.6
नाहमौपयिकी भार्या परभार्या सती तव ।साधु धर्ममवेक्षस्व साधु साधुव्रतं चर॥
nāhamaupayikī bhāryā parabhāryā satī tava |sādhu dharmamavekṣasva sādhu sādhuvrataṃ cara ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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